ओडिशा: कब खुलेगा जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार. क्या है इसके पीछे का राज?

चार धामों में से एक है ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर, इस वक्त ये अपने रत्न भंडार की वजह से चर्चा में है. मंदिर के रत्न भंडार को दोबारा खोलने की बात चल रही है. भंडार से खजाने के सामान की लिस्ट को तैयार किया जाना है.इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार ने एक कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी में कई पूर्व जजों को भी रखा गया है. इस कमेटी का गठन ओडिशा हाई कोर्ट के निर्देश पर किया गया है.मार्च 2024 में ओडिशा की उस समय की नवीन पटनायक सरकार ने भंडार में रखे गहनों और बर्तनों की लिस्ट बनाने की तैयारी की थी. इसकी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तब की पटनायक सरकार ने भी एक कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी का काम रत्न भंडार में रखे आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की सूची पर नजर रखना था. इस कमेटी में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज अरिजीत पसायत की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय समिति का गठन किया था.

क्या है मामला?

ओडिशा सरकार ने अप्रैल 2018 में हाई कोर्ट और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के निर्देश पर जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को खोलने का आदेश दिया था. भंडार की चाबी खो जाने की वजह से उसे खोला नहीं जा सका. जांच के बाद भी अभी तक खोई हुई चाबियों का कुछ पता नहीं चल सका. चाबी तो नहीं मिली लेकिन ये मुद्दा चुनाव में काफी जोर-शोर से उठाया गया.बीजेपी की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस पर काफी बातें कीं. इससे जुड़ी न्यायिक रिपोर्ट की मांग भी उठाई गई थी. हालांकि, अब इस मामले में सरकार भंडार के अंदर के राज को खोलने जा रही है और उसके अंदर मौजूद चीजों की सूची तैयार करने जा रही है.

क्या है रत्न भंडार के अंदर?

रत्न भंडार के अंदर लगभग 862 साल पुराना जगन्नाथ मंदिर का खजाना है. कहा जाता है कि रत्न भंडार में जगन्नाथ मंदिर के तीनों देवताओं जगन्नाथ, बालभद्र और सुभद्रा के गहने रखे गए हैं. यही नहीं, बल्कि कीमती बर्तन भी रखे गए हैं. पिछले 40 सालों से इस भंडार के गेट बंद हैं. अब इस भंडार को दोबारा खोलने की बात की जा रही है.

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