पहले दिन नए क्रिमिनल लॉ के तहत इन राज्यों में दर्ज हुए मामले, कई राज्यों में पुलिस को दी गई ट्रेनिंग

पूरे देश में सोमवार से नए क्रिमिनल लॉ लागू हो गए हैं. जिसके चलते ब्रिटिश काल की भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS), दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) ने ले ली है.पहली जुलाई से लागू किए गए इस नए कानून के तहत देश के कई राज्यों में पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं.

मध्य प्रदेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सोमवार को लागू हुए नए आपराधिक न्याय कानूनों के तहत पहला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मोटरसाइकिल चोरी के लिए दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा कि नए कानून सजा के मुकाबले न्याय को प्राथमिकता देंगे.

ओडिशा
ओडिशा पुलिस ने सोमवार को एक निजी फर्म के कर्मचारी को कथित तौर पर धमकाने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ नई आपराधिक संहिता, भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत अपनी पहली एफआईआर दर्ज की. भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत पीड़ित के बेटे रुद्र प्रसाद दास की शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 126 (2), 115 (2), 109, 118 (1) और 3 (5) के तहत भुवनेश्वर के लक्ष्मीसागर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई.पीटीआई के मुताबिक उस FIR में कहा गया है कि तीन लोगों ने 29 जून की रात करीब 8.15 बजे चिंतामणिश्वर मंदिर के पास रुद्र के पिता गौरंगा चरण दास पर ब्लेड से हमला किया. लक्ष्मीसागर थाने के प्रभारी निरीक्षक पी श्याम सुंदर राव ने मामला (सं. 370/24) दर्ज किया और एसआई जी साहा को जांच का जिम्मा सौंपा है. आरोपी पिछले कुछ दिनों से गौरंगा को धमका रहे थे और 29 जून को उन पर ब्लेड से हमला कर दिया.

महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत पहली एफआईआर सोमवार को सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी पुलिस द्वारा दर्ज की गई. उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बात की जानकारी सोमवार को ही विधानसभा में दी. हालांकि उन्होंने उस मामले का विवरण नहीं दिया, जिसकी एफआईआर दर्ज की गई है.

उत्तर प्रदेश
राज्य के अमरोहा जिले का रेहरा थाना यूपी के उन पहले थानों में शामिल हो गया, जिन्होंने भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया है. अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि करंट लगने से हुई मौत के मामले में यह केस दर्ज किया गया है. ढकिया गांव निवासी संजय सिंह की शिकायत पर राजवीर उर्फ ​​राजू और भूप सिंह उर्फ ​​भोलू के खिलाफ बीएनएस 106 (लापरवाही से मौत) के तहत मामला दर्ज किया गया है.संजय सिंह ने आरोप लगाया कि दोनों ने उनके खेत में बिजली का तार लगाया था, जिसके कारण उनके पिता जगपाल को करंट लग गया. घटना सोमवार सुबह की है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इतिहास रच रहा है. अमरोहा जिले का रेहरा थाना उत्तर प्रदेश में नए भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज करने वाले पहले थानों में से एक बन गया है, जो राज्य के कानून प्रवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

कर्नाटक
सोमवार को देश में लागू हुए तीन नए क्रिमिनल लॉ के संबंध में राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया. राज्य के डीजीपी आलोक मोहन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘हमारे सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को, सभी 7 क्षेत्रों, 6 आयुक्त इकाइयों और 1063 पुलिस स्टेशनों में प्रशिक्षण दिया गया है और इस विषय पर प्रक्रिया जारी है.’ सोमवार से, सभी नई एफआईआर बीएनएस के तहत दर्ज की जाएंगी. हालांकि, पहले दर्ज किए गए मामलों पर उनके अंतिम निपटारे तक पुराने कानूनों के तहत मुकदमा चलता रहेगा.

आंध्र प्रदेश
राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सीएच द्वारका त्रियुमाला राव ने कहा कि नए कानून 1 जुलाई से लागू हो गए हैं. 1 जुलाई, 2024 से इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया. नए कानूनों के क्रियान्वयन के मद्देनजर अनकापल्ली जिला पुलिस ने रविवार को सभी पुलिस अधिकारियों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किया. रविवार को तिरुपति जिला पुलिस ने भी इसी तरह का अभ्यास किया.हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक तीन नए आपराधिक कानूनों का तेलुगु अनुवाद पूरा नहीं किया है. इससे पहले, कानून सचिव वी सुनीता ने कहा था कि भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 का केवल आधा अनुवाद कार्य पूरा हुआ है.

झारखंड
राज्य के डीजीपी अजय कुमार सिंह ने कहा कि सोमवार को देश में लागू हुए नए आपराधिक कानून से सजा दर में बढ़ोतरी होगी. उन्होंने कहा कि झारखंड में सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नए आपराधिक कानूनों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है और आम लोगों को कानूनों के बारे में जागरूक किया जा रहा है. सोमवार को देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू हुए, जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में दूरगामी बदलाव आए हैं.

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